
करौली, खरगोन (Karauli, Khargone) जैसी जगहों के बाद सांप्रदायिक टकराव (communal conflict) की आंच दिल्ली के जहांगीरपुरी (Jahangirpuri) तक पहुँच गई है। फरवरी 2020 दंगों (riots) के बाद दिल्ली में ये सांप्रदायिक टकराव का यह पहला बड़ा मामला है। हालांकि, उस दौरान जहांगीरपुरी में कोई दंगा नहीं हुआ था। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन स्थानीय लोगों से बात करने पर तनाव साफ़ जा़हिर होता हैं। रविवार को जहांगीरपुरी थाने के बाहर गिरफ़्तार पुरुषों के घरों की महिलाएँ घंटों से दिन की कड़ी धूप में गेट के बाहर खड़ी इंतज़ार कर रही थीं। रोज़ा रख कर खड़ी थकी-हारी महिलाएं ग़ुस्से में थीं। पुलिसकर्मियों ने महिलाऔं को थाने से बाहर जाने को कहा और मुख्य द्वार बंद कर दिया।
वहाँ मोजूद एक महिला ने कहा, “जिनके बीच लड़ाई हुई उनको तो उठाया नहीं, बेकसूरों को उठा कर लाए हैं।”
दूसरी महिला ने कहा, “हमारे देवर को बोल रहे हैं कि आतंकवादी है, आप तो सच को झूठ, झूठ को सच कर देते हो।”
तीसरी महिला ने कहा, “हम मुसलमान क्या जानवर हैं? हमारे बच्चों का अगर कोई रिकॉर्ड है तो क्या उन्हें सुधरने का मौका नहीं दिया जा सकता?”
स्थानीय लोग बताते हैं कि जहांगीरपुरी में कभी ऐसी घटना नहीं हुई है, पर शनिवार की हिंसा के बाद यहाँ तनाव का माहोल है।
ये हिंसा कैसे हुई, क्यों हुई – पहले की तरह जहांगीरपुरी में जवाब बंटे हुए हैं। जिसे देखो मोबाइल पर हिंसा के वायरल वीडियो देखता नज़र आता है।
शोभायात्रा में शामिल लोगों का कहना हैं
शनिवार की शोभायात्रा में गौरीशंकर गुप्ता भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि जब यात्रा जहांगीरपुरी ‘सी ब्लॉक’ की मस्जिद के सामने से निकल रही थी तो उस पर पथराव शुरू हो गए। गौरीशंकर के मुताबिक़ मस्जिद की छत से पथराव हो रहा था। जबकि मस्जिद के प्रबंधक मोहम्मद सलाउद्दीन ने इस बात से साफ इनकार कर दिया।
गौरीशंकर के मुताबिक़ घरों के ऊपर से महिलाओं ने भी शोभायात्रा पर पत्थरावं किया। उन्होंने कहाँ की वह “बड़ी मुश्किल से जान पर खेल कर शोभायात्रा से हनुमान जी की मूर्ति लेकर आऐ हैं। हमें घेर कर मारा गया। पत्थरों से, तलवार, चाकू से यहाँ राशन की गाड़ी लगी थी, उसके शीशे फोड़े गए हैं। उसका राशन भी लूटा गया है। गाड़ियों को पलटा गया है। आगे परचून की दुकान है। उनका गल्ला लूटा गया है। एक बाइक में आग लगा दी गई है।
गौरीशंकर का दावा है यात्रा में कोई विवादास्पद नारे नहीं लगे और जय श्रीराम का नारा तब लगा जब उनके ऊपर हमला किया गया।
वो कहते हैं, “उनकी ओर से पत्थर, तलवार, चाकू सब चले हैं। पेट्रोल बम तक चले हैं. गोलियां तक चली हैं। चार पुलिसवाले भी घायल हैं।”
जहांगीरपुरी की तंग गलियों से होते हुए हम शोभायात्रा के संयोजक सुखेन सरकार के पास पहुंचे। उनके आसपास माहौल तनावपूर्ण था।
ज़मीन पर एक दरी पर हनुमान मंदिर के सामने बैठे सुखेन सरकार के मुताबिक़ शोभा यात्रा पर करीब सौ लोगों ने पत्थरबाज़ी की थी।
वो कहते हैं, “लोग तो हमारे भी थे, लेकिन हम तो लड़ाई-झगड़ा करने के मूड में नहीं थे। हम तो शोभायात्रा निकालकर भगवा ध्वज लेकर आ रहे थे, हम तो निहत्थे थे, ऊपर से जैसे पत्थरों और शीशे की बारिश हो रही थी।
लेकिन ये पत्थरबाज़ी क्यों हुई, इस पर सुखेन सरकार कहते हैं, “क्या पता उन्हें जय श्रीराम से जलन है, भगवा रंग से उन लोगों को जलन है।
सुखेन के नज़दीक एक कूलर के सामने बैठे बाबा योगी ओमनाथ ने बताया की मेरी छाती पर पत्थर लगा। मेरे पैर में भी लगा है। ये देखिए पैर सूजा हुआ है मेरा। ऐसा कहकर उन्होंने अपना पांव दिखाया।
दुकानें लूटी गई हैं, मेरे पास सबूत है उसका, बाइकें जलाई गई हैं, ईंटें मस्जिद के ऊपर रखी गईं, मेरे पास इसका भी सबूत है। छतों के ऊपर से बारिश हुई, मेरे पास इसका सबूत है क्योंकि मैं आखिर तक लड़ा।
मस्जिद के आसपास के लोगों का अलग कहना हैं
जहांगीरपुरी सी ब्लॉक का भीड़ भरा इलाका घटना स्थल की जगह से कुछ ही दूरी पर हैं।
यहाँ हिंसा कैसे शुरू हुई उसे लेकर यहाँ अलग ही है।
एक कमरे में बैठे मस्जिद के प्रबंधक मोहम्मद सलाउद्दीन कहते हैं, हमारे बच्चे आख़िर तक ख़ामोश रहे, जब उन्होंने देखा कि मस्जिद पर हमला हो रहा है और मस्जिद के ऊपर पत्थरबाज़ी हो रही है, तो हम बर्दाश्त तो कर नहीं सके।
उनके मुताबिक़ मस्जिद से किसी ने कोई पत्थरबाज़ी नहीं की और जो कुछ भी हुआ वह रोड पर ही हुआ।
उन्होंने बताया कि मस्जिद 1976 में बनी और वो सालों से इसकी देखभाल कर रहे हैं।
वहीं पर बैठे इनामुल हक़ ने बताया कि सी ब्लॉक में रहने वाले ज़्यादातर मुसलमान ग़रीब तबके के हैं जो छोटे-मोटे काम करके अपना गुज़र बसर करते हैं।
मोहम्मद सलाउद्दीन का दावा है कि ”सबसे पहले पत्थर यात्रा निकाल रहें लोगो की ओर से आया। जिसके जवाब में पत्थरबाज़ी शुरु हुई।
सी ब्लॉक में मेरी मुलाक़ात शहादत अली से हुई, शनिवार को जब शोभा यात्रा निकली तब वो वहीं मौजूद थे।
शहादत के मुताबिक़ शुरुआत में यात्राएं बहुत शांतिपूर्ण तरीके से निकली, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई।
उन्होंने अपने मोबाइल पर एक वीडियो दिखाया। शोभायात्रा के इस वीडियो में लोग तलवार लिए नज़र आ रहे थे।
शहादत के मुताबिक़ वह अपने घर पर इफ़्तारी की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक यात्रा में शामिल लोग पत्थरबाज़ी करने लगे और ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाकर मस्जिदों में घुस गए।
शहादत ने कहां कि लोग मस्जिद में कथित तौर पर झंडा लगाने की कोशिश कर रहे थे।
नज़दीक में खड़ी रोशन जो ख़ुद को भाजपा से जुड़ा बताती हैं, उनके मुताबिक़ जो कुछ जहांगीरपुरी में हुआ वो करवाया गया था।
वो कहती हैं, “इसमें किसी का तगड़ा हाथ है, हमारे जहांगीरपुरी में ये कभी नहीं हुआ, ये करवाया गया है।
जहांगीरपुरी पुलिस थाने के बाहर गिरफ़्तार किए गए एक अभियुक्त की एक रिश्तेदार ने कहा, “उनके (शोभायात्रा में शामिल लोगों के) हाथ में तलवार, पिस्टल न जाने क्या-क्या था। ला-लाकर दिखा रहे थे। वो कह रहे थे हिंदुस्तान में रहना होगा तो ‘जय श्रीराम’ कहना होगा. कहीं लिखा हुआ है क्या?
मीडिया में छपे इन आरोपों पर कि ‘सी ब्लॉक में कथित तौर पर बांग्लादेशी रहते हैं’, इस पर एक महिला साज़दा ने कहा कि ये सारे लोग कलकत्ते के हैं। प्रूफ़ देख लीजिए, मुसलमानों की ज़बान पर तो यक़ीन होता नहीं है, मीडिया वालों ने पहले से ही मुसलमानों को बदनाम कर रखा है, बांग्लादेशी और कलकत्ते के लोगों की भाषा अलग है।
मोहम्मद अंसार की गिरफ़्तारी
मोहम्मद अंसार को भी गिरफ़्तारी के बाद उनकी पत्नी सकीना बीवी का केहना हैं की उनके मुताबिक़ वो घटनास्थल पर लोगों को बचाने गए थे, नाकि फसाद बढ़ाने। यहां तक की उनकी पड़ोसन कमलेश गुप्ता जो की हिन्दु हैं, उन्होने भी कुछ ऐसा ही बताया।
तो वहीं स्पेशल पुलिस कमिश्नर दीपेंद्र पाठक के अनुसार अंसार का आपराधिक रिकॉर्ड है और उन पर पुलिस का सर्वेलेंस रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक़ गिरफ़्तार लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशासन माहौल को शांत रखने की कोशिश में जुटा है, सड़कों पर सुरक्षाबलो को तैनात कर दिया गया हैं, लेकिन लोगों से बात करें तो लगता है एक-दूसरे को लेकर असुरक्षा की भावना गहरी होती जा रही है,और यह हिंन्दु-मुस्लिमों में दूरियां बढ़ रही हैं।
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
जहांगीरपुरी हिंसा मामले में पुलिस ने अब तक 23 लोगों को गिरफ़्तार किया है। जिनमें से दो नाबालिग़ हैं। गिरफ़्तार हुए 14 लोगों को रविवार रोहिणी कोर्ट में पेश कराया गया।
कोर्ट ने अंसार और असलम नाम के दो लोगो को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है, न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, बाकी 14 लोगो को दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
हनुमान जयंती की शोभा यात्रा के दौरान दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाक़े में हुई हिंसा पर स्वत: संज्ञान लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है। सुप्रीम कोर्ट इस घटना की अदालत की निगरानी में मुख्य रूप से जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया हैं, कि दिल्ली पुलिस की अब तक की जाँच, एकतरफ़ा हैं, और सांप्रदायिक होने के अलावा असली अपराधियों को बचाने का प्रयास लगातार कर रही हैं।