
यूक्रेनी अधिकारियों ने देश के पूर्वी शहर लिसिचांस्क में रह रहे अपने नागरिकों से कहा है कि वो तुरंत शहर छोड़ दें। लुहांस्क के गवर्नर सर्हे हैदी ने कहा है कि अब स्थिति बेहद मुश्किल है और वहां जिदंगी को असल मायनों में ख़तरा हैं।
उन्होंने लोगों से कहा कि वो ये सुनिश्चित करें कि उन्हें यूक्रेन में बने राहत कैंपों में लेकर जाया जाए। लिसिचांस्क शहर लुहांस्क प्रांत में पड़ता है। रूसी सैनिकों ने लगातार कई सप्ताह की बमबारी की और उस के बाद लिसिचांस्क के पास एक और बड़े शहर सेवेरोदोनेत्स्क को कब्ज़े में ले लिया है।
बंदरगाह शहर मारियुपोल के बाद रूसी सैनिकों के कब्ज़े में जानेवाला सेवेरोदोनेत्स्क यूक्रेन का दूसरा बड़ा शहर है। यूक्रेनी सरकार ने इस शहर से अपनी फौजों को पूरी तरह पीछे हटा लिया है।
सेवेरोदोनेत्स्क के मेयर अलेक्ज़ेंडर स्ट्रिक ने कहा कि शहर में जो लोग बच गए हैं वो भारी दिक्कत का सामना कर रहे हैं।
अलेक्ज़ेंडर स्ट्रिक ने कहा, “रूसी सेना शहर में है। वो शहर में किसी तरह का प्रशासन बनाना चाहती है। इसके लिए वो यहां पर अपने किसी कमांडेन्ट को नियुक्त करेगी। हमें जो जानकारी मिली है उसके अनुसार वहां मानवीय स्थिति बेहद बुरी है। वहां खाने के सामान की कमी है, लोगों के लिए रहना बेहद मुश्किल है क्योंकि वहां इमारतों के नाम पर कुछ बचा नहीं।
नेटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने कहा है कि युद्ध के लिए तैयार रहने वाले गठबंधन देशों की सैनिकों की संख्या को चालीस हज़ार से बढ़ाकर क़रीब दस गुना यानी तीन लाख तक किया जाएगा। इन सैनिकों को और हथियारों को पूर्व के सदस्य देशों में तैनात किया जाएगा।
स्टोल्टनबर्ग ने कहा है कि गठबंधन की सुरक्षा और मूल्यों के लिए रूस सबसे बड़ा और सीधा ख़तरा बनता जा रहा है।
दूसरी तरफ जर्मनी में जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे नेताओं ने कहा कि यूक्रेन जब तक चाहेगा तब तक वो उसे समर्थन देते रहेंगे।
नेताओं ने कहा कि वे सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक रूप से यूक्रेन का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने रूस पर प्रतिबंध कड़े करने का भी वादा भी किया।
इस सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने वर्चुअली हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि सर्दियों के शुरू होने से पहले ये युद्ध ख़त्म हो जाए। उन्होंने जी-7 देशों के नेताओं से अपील की कि वो रूस पर दबाव बनाए रखें।
उन्होंने नेताओं से भारी हथियार और एंटी एयरक्राफ्ट डिफेन्स सिस्टम देनी की अपील की साथ ही कहा कि वो रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाएं।