
राज कपूर के प्रति पूरे सोवियत संघ में दीवानगी तब और बढ़ गई जब उनकी अगली फ़िल्म ‘श्री 420’ रिलीज़ हुई थी। वर्ष 1954 में जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल सोवियत संघ गया तो हर जगह यही माँग उठती थी कि राज कपूर ‘आवारा हूँ’ गाएं और उन्होंने पूरे दिल से गाया भी।
राज कपूर की बेटी ऋतु नंदा ने अपनी किताब ‘राज कपूर द वन एंड ओनली शोमैन’ में लिखा, ‘हर जगह ये दृश्य आम होता था कि राज कपूर पियानो के स्टूल पर बैठे हैं। उनको चारों तरफ़ से वोदका के गिलास ऑफ़र किए जा रहे हैं। उनका खुद का व्हिस्की का गिलास ख़ाली पड़ा हुआ है। वो जैसे ही गाना शुरू करते थे। स्त्री और पुरुष सभी नाचते हुए उनके सुर में सुर मिलाने लगते हैं।
जब नेहरू अपनी पहली सोवियत यात्रा पर गए थे तो भीड़ उन्हें देख कर चिल्लाया करती थी। ‘आवारा हूँ’
उस समय बुलगानिन सोवियत संघ के प्रधानमंत्री हुआ करते थे। जब एक सरकारी भोज में नेहरू के बाद बुलगानिन के बोलने की बारी आई तो उन्होंने ‘आवारा हूँ’ गा कर सुनाया’